मोक्ष दिलाते हैं बाबा विश्वनाथ

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मोक्ष दिलाते हैं बाबा विश्वनाथ

काशी में स्थित बाबा विश्वनाथ भक्तों की न सिर्फ सभी मनोकामना पूर्ण करते हैं, बल्कि उन्हें मोक्ष भी दिलाते हैं।

देवताओं की नगरी काशी में श्रीकाशी विश्वनाथ शिवलिंग के रूप में साक्षात विराजते हैं महादेव। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में इनका नौवां स्थान है। काशी पतित पावनी गंगा के तट पर बसी है। माना जाता है कि यह महादेव के त्रिशूल पर टिकी है। धर्मग्रंथों और पुराणों में इसे मोक्ष की नगरी कहा जाता है। यह अनंतकाल से बाबा विश्वनाथ के जयकारों से गूंज रही है। शिवभक्त यहां मोक्ष की तलाश में आते हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर के बारे में मान्यता है कि अगर कोई भक्त बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाता है, तो उसे जन्म-जन्मांतर के चक्र से मुक्ति मिल जाती है।
बाबा अपने भक्तों के लिए मोक्ष के द्वार खोल देते हैं। प्रचलित मान्यता के अनुसार एक भक्त को भगवान शिव ने स्वप्न में दर्शन देकर कहा कि गंगा स्नान के बाद उसे दो शिवलिंग मिलेंगे। जब वह उन दोनों शिवलिंगों को जोड़कर उन्हें स्थापित करेगा तो शिव और शक्ति के दिव्य शिवलिंग की स्थापना होगी। तभी से भगवान शिव यहां मां पार्वती के साथ विराजमान हैं। दूसरी मान्यता के अनुसार, मां भगवती ने खुद महादेव को यहां स्थापित किया था।

बाबा विश्वनाथ के मंदिर में सुबह की मंगला आरती के साथ पूरे दिन में चार बार आरती होती है। सावन का हर दिन पावन है और इस दौरान जल चढ़ाने से बाबा प्रसन्न होते हैं। सावन मास के सोमवार को जलाभिषेक की अधिक महत्ता है। यहां आने पर एक तरफ शिव के विराट और बेहद दुर्लभ रूप के दर्शन का सौभाग्य मिलता है, तो वहीं दूसरी तरफ गंगा स्नान से तन और मन, दोनों स्फूर्तिवान हो जाते हैं।
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा में है। चौखट के ऊपर सूर्य, चंद्रमा और गणेश जी की आकृतियां अंकित हैं। बाबा के दर्शन से पहले इन देवताओं के दर्शन का विधान है। मंदिर परिसर में सत्यनारायण भगवान, पार्वती जी, अन्नपूर्णा जी, अविमुक्तेश्वर महादेव, महाकालेश्वर, तारकेश्वर महादेव, भुवनेश्वर महादेव के दर्शन-पूजन का लाभ भी मिलता है।

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– रवींद्र प्रकाश त्रिपाठी

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