फोन टैपिंग-जासूसी जैसे मुद्दों पर भी अब सार्वजनिक चर्चा जरूरी

  • आखिर क्या जरूरत है देश में फोन टैपिंग और लोगों की जासूसी की ?
  • क्या लोकतंत्र में हमारा संविधान इस बात की इजाजत देता है ?
  • क्या वाकई ऐसा कुछ हुआ या सिर्फ ये एक माहौल है? 
  • सच्चाई के साथ सरकार को देना चाहिए इस पर स्पष्टीकरण
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विजय श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार,

दिल्ली। यदि नहीं तो फिर क्यों इस तरह की हरकत हमारी माननीय सरकार कर रही है? क्या ये किसी की निजता का हनन नहीं है? भारत में  आखिर किस संवैधानिक अधिकार ने सरकार को लोगों की जासूसी और फोन टैपिंग की परमिशन दी? क्या जिन लोगों के फोन टैप हुए या जिन लोगों की जासूसी की बात सामने आ रही उनमें से किसी का भी कोई आपराधिक रिकॉर्ड है या इनमें से कोई भी आपराधिक गतिविधियों में शामिल है अगर ऐसा नहीं तो फिर कथित तौर पर भारत सरकार ने क्यों करीब 300 लोगों के फोन टैप कर उनकी जासूसी की। दरअसल कांग्रेस ने भाजपा पर इजराइल के एक सॉफ्टवेयर पेगासस द्वारा भारत के लोगों की जासूसी का आरोप लगाया है। 

 

संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सदन में जबरदस्त हंगामा

 

आज संसद के मानसून सत्र के पहले दिन विपक्ष ने राहुल गांधी की जासूसी की खबर को लेकर सदन में जबरदस्त हंगामा किया। मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कांग्रेस ने गृहमंत्री अमित शाह से इस्तीफा देने की मांग कर डाली। रणदीप सुरजेवाला ने इस पर कहा इसका मतलब तो ये हुआ कि सरकार लोकतंत्र के खिलाफ है। कांग्रेस ने कहा राहुल गांधी गरीबों के हक,न्याय और आजादी के लिए लड़ते हैं उन्होंने कौनसा देशविरोधी काम किया है जो उनकी जासूसी करवाई जा रही है। 

दरअसल देश में इस तरह का घटनाक्रम वाकई लोगों की चिंता बढ़ाने वाला है क्योंकि एक दावे के अनुसार भारत के कई दिग्गज नेता पक्ष और विपक्ष के साथ-साथ वरिष्ठ पत्रकारों के फोन टैपिंग का मामला सामने आया है। दुनियाभर के 17 मीडिया संस्थानों के कंसोर्टियम ने रविवार को एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिससे दुनियाभर में हड़कंप मच गया। रिपोर्ट के मुताबिक भारत सहित कई देशों की सरकारों ने 150  से ज्यादा पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अन्य एक्टीविस्टों की जासूसी करवाई। इधर ‘द वायर’ ने अपनी रिपोर्ट में ऐसे कुछ नामों का खुलासा किया जिनके फोन इस्राइली कंपनी के सॉफ्टवेयर से टैप किए गए। इन नामों में राहुल गांधी और प्रशांत किशोर जैसे लोगों सहित केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रहलाद सिंह पटेल का नाम भी शामिल है।

 

 

भाजपा ने आरोपों को सिरे से नकारा 

 

कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए पूर्व आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भाजपा का पक्ष रखते हुए फोन टैपिंग की खबर को सिरे से नकार दिया, उन्होंने कहा कांग्रेस स्तरहीन आरोप लगा रही है, जिस मीडिया हाउस की खबरों को आधार बनाकर कांग्रेस आरोप लगा रही है वो पहले भी झूठा साबित हो चुका है। हालांकि रविशंकर प्रसाद ने ये भी कहा कि सॉफ्टवेयर कंपनी भारत सहित 45देशों को यह सॉफ्टवेयर देती है तो भी भारत को ही टारगेट क्यों बनाया जा रहा है? कांग्रेस बेबुनियादी बातों का ऐजेंडा बनाकर सदन का समय खराब कर रही है। गौरतलब है कि सूचना प्रोद्योगिकी और संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पेगासस सॉफ्टवेयर के जरिए भारतीयों की जासूसी करने संबंधी खबरों को गलत बताते हुए कहा कि संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले ये आरोप लगाकर भारतीय लोकतंत्र की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया है।

 

सरकार की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवाल

 

अब प्रश्न ये उठता है कि कथित तौर पर सरकार का यह कृत्य सरकार की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है। जब सरकार आज पत्रकारों, दिग्गज नेताओं और अपने आलोचकों पर नजर रखने के लिए ऐसा कर सकती है तो क्या गारंटी है कि एक रोज इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल भारतीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों को भारत के शत्रुओ तक पहुंचाने में नहीं होगा? ऐसे में तो देश के प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री, सेनाप्रमुख और परमाणु कार्यक्रमों से जुड़े विशेषज्ञों की सूचनाएं भी सुरक्षित नहीं रहेंगी। 

लेकिन अब सवाल ये है कि क्या वाकई दुनियाभर के अन्य देशों की तरह भारत सरकार के इशारे पर ऐसा कुछ हुआ है। हालांकि पक्ष और विपक्ष के साथ-साथ लोगों के भी इसको लेकर अपने-अपने मत हैं फिर भी एक बात तो तय है कि भारतीय संविधान इस तरह की खुफिया निगरानी करने की अनुमति किसी को भी नहीं देता जिससे के किसी का व्यक्तिगत, धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक जीवन प्रभावित हो। वहीं इस्राइली सॉफ‌्टवेयर पेगासस बनाने वाली कंपनी एनएसओ के सूत्रों के अनुसार यह सॉफ्टवेयर सिर्फ लोकतांत्रिक देशों को उनके राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए उपलब्ध कराया जाता है। जिसका उद्देश्य केवल कानून तोड़ने वालों, अपराधियों, उग्रवादी संगठनों और माफियाओं से संबंधित गिरोहों से निपटने के लिए किया जाना है। 

सॉफ्टवेयर कंपनी ने दी अपनी सफाई

एनएसओ कंपनी ने सॉफ्टवेयर को लेकर खुलासे पर अपना बयान जारी किया है। कंपनी के आलाधिकारियों को कहना है कि फॉरबिडन स्टोरीज की रिपोर्ट गलत धारणाओं और अपुष्ट सिद्धांतों से भरी है। कंपनी ने कहा कि रिपोर्ट का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है और ये रिपोर्ट सच्चाई से है। कंपनी की मानें तो अज्ञात सूत्रों ने किसी के साथ गलत जानकारी साझा की है।   

 

बहरहाल इस मसले पर अभी और कई खुलासे और चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ सकती हैं लेकिन इन सब आरोपों प्रत्यारोपों के बीच सरकार को एक स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए जिसमें इस बात का पूरा खुलासा हो कि वाकई ये खबर सरासर झूठी या फिर केंद्र सरकार ने ऐसा कोई काम देशहित में किया है। क्योंकि ऐसा जब तक नहीं होगा जनता और विपक्ष दोनों के निशाने पर सरकार बनी रहेगी।

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